वीरान यारों घर हुआ है अब वहाँ ख़ुशहाल था जर्जर हुआ है अब वहाँ
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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या'नी कि इश्क़ अपना मुकम्मल नहीं हुआ गर मैं तुम्हारे हिज्र में पागल नहीं हुआ वो शख़्स सालों बा'द भी कितना हसीन है वो रंग कैनवस पे कभी डल नहीं हुआ
Kushal Dauneria
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भूलभुलैया था उन ज़ुल्फ़ों में लेकिन हम को उस में अपनी राहें दिखती थीं आप की आँखों को देखा तो इल्म हुआ क्यूँँ अर्जुन को केवल आँखें दिखती थीं
Ashraf Jahangeer
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क्या हुआ जो मुझे हम-उम्र मोहब्बत न मिली मेरी ख़्वाहिश भी यही थी कि बड़ी आग लगे
Muzdum Khan
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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सच बताओं मर्सिया-ख़्वानी किसे मालूम है आँख से बहता हुआ पानी किसे मालूम है
Manohar Shimpi
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वहशत-ए-दिल किसे बताऊँगा कौन क़ाबिल किसे बताऊँगा
Manohar Shimpi
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उम्र कोई भी हो सब बच्चियाँ हँसा करतीं बात बात पर थोड़े लड़कियाँ हँसा करतीं
Manohar Shimpi
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तुम मिली ये ब-दौलत लगे हमनशीं ख़ूब-सूरत लगे
Manohar Shimpi
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ज़िक्र जब भी हो गुनाहों का 'मनोहर' फ़ैसला तो फिर अदालत ही करेगी
Manohar Shimpi
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