क्या हुआ जो मुझे हम-उम्र मोहब्बत न मिली मेरी ख़्वाहिश भी यही थी कि बड़ी आग लगे
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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चले जाओ मगर इतनी मदद करते हुए जाओ मैं तन्हा मर न जाऊँ दो अदद करते हुए जाओ चराग़ों की जलन से ख़त्म हो जाती है तारीक़ी हसद करते हुए आओ हसद करते हुए जाओ
Muzdum Khan
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न सिर्फ़ ये कि जहन्नुम ख़िताब में भी नहीं अली के मानने वालों के ख़्वाब में भी नहीं
Muzdum Khan
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बस एक मैं था जिस सेे सच मुच में दिलबरी की वरना हर आदमी से उस ने दो नंबरी की जिस बात में भी हम ने ख़ुद को अकेला रक्खा बाग़ात में भी हम ने जोड़ों की मुख़बरी की
Muzdum Khan
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न कोई बीन बजाई न टोकरी खोली बस एक फोन मिलाने पे साँप बैठा है कोई भी लड़की अकेली नज़र नहीं आती यहाँ हर एक ख़जाने पे साँप बैठा है
Muzdum Khan
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साल के तीन सौ पैंसठ दिन में एक भी रात नहीं है उस की वो मुझे छोड़ दे और ख़ुश भी रहे इतनी औक़ात नहीं है उस की
Muzdum Khan
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