न कोई बीन बजाई न टोकरी खोली बस एक फोन मिलाने पे साँप बैठा है कोई भी लड़की अकेली नज़र नहीं आती यहाँ हर एक ख़जाने पे साँप बैठा है
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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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न सिर्फ़ ये कि जहन्नुम ख़िताब में भी नहीं अली के मानने वालों के ख़्वाब में भी नहीं
Muzdum Khan
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बस एक मैं था जिस सेे सच मुच में दिलबरी की वरना हर आदमी से उस ने दो नंबरी की जिस बात में भी हम ने ख़ुद को अकेला रक्खा बाग़ात में भी हम ने जोड़ों की मुख़बरी की
Muzdum Khan
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चले जाओ मगर इतनी मदद करते हुए जाओ मैं तन्हा मर न जाऊँ दो अदद करते हुए जाओ चराग़ों की जलन से ख़त्म हो जाती है तारीक़ी हसद करते हुए आओ हसद करते हुए जाओ
Muzdum Khan
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हम दो बंदे हैं और सिगरेट एक अब ख़बर होगी दोस्ती की दोस्त
Muzdum Khan
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तुम नहीं उतरोगी मैं उतरूँगा गहराई में पगड़ी बड़ी होती है दुपट्टे से लंबाई में
Muzdum Khan
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