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न सिर्फ़ ये कि जहन्नुम ख़िताब में भी नहीं अली के मानने वालों के ख़्वाब में भी नहीं

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बस एक मैं था जिस सेे सच मुच में दिलबरी की वरना हर आदमी से उस ने दो नंबरी की जिस बात में भी हम ने ख़ुद को अकेला रक्खा बाग़ात में भी हम ने जोड़ों की मुख़बरी की

Muzdum Khan

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न कोई बीन बजाई न टोकरी खोली बस एक फोन मिलाने पे साँप बैठा है कोई भी लड़की अकेली नज़र नहीं आती यहाँ हर एक ख़जाने पे साँप बैठा है

Muzdum Khan

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चले जाओ मगर इतनी मदद करते हुए जाओ मैं तन्हा मर न जाऊँ दो अदद करते हुए जाओ चराग़ों की जलन से ख़त्म हो जाती है तारीक़ी हसद करते हुए आओ हसद करते हुए जाओ

Muzdum Khan

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तुम नहीं उतरोगी मैं उतरूँगा गहराई में पगड़ी बड़ी होती है दुपट्टे से लंबाई में

Muzdum Khan

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हम दो बंदे हैं और सिगरेट एक अब ख़बर होगी दोस्ती की दोस्त

Muzdum Khan

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