रोज़ जय श्रीराम या अल्लाहू अकबर पर लड़े क्यूँ सभी जय हिंद का नारा लगा सकते नहीं
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे
Ali Zaryoun
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पड़ी रहने दो इंसानों की लाशें ज़मीं का बोझ हल्का क्यूँँ करें हम
Jaun Elia
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तू जो हर रोज़ नए हुस्न पे मर जाता है तू बताएगा मुझे इश्क़ है क्या जाने दे
Ali Zaryoun
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यहाँ हम ने सँभाला होश है जबसे तभी से हो रहीं रफ़्तार की बातें
Vivek Vistar
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टूटा दिल तोड़ा कैसे जाए, तुम सेे सीखा है अपनों को छोड़ा कैसे जाए, तुम सेे सीखा है सबके मुआफ़िक़ बातें करना तो आता था लेकिन बात का रुख़ मोड़ा कैसे जाए, तुम सेे सीखा है
Vivek Vistar
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उस की आँखें याद हैं मुझ को उस का चेहरा याद नहीं है
Vivek Vistar
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पिछला शे'र मुक़र्रर कर दो अगला मिसरा याद नहीं है
Vivek Vistar
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तेरी तस्वीर नज़रों में ज़रा उतरे मेरे सिर से भला कैसे नशा उतरे
Vivek Vistar
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