रोज़ माँगू दु'आओं में उन को मगर अब कोई यत्न भी काम आते नहीं प्रेम की माला पर कितना सिमरूॅं उन्हें इस अयोध्या के अब राम आते नहीं
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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ये दुनिया जो अपनों को भी याद नहीं अब करती है मुझ को याद रखेगी इस उम्मीद पे ही दम तोड़ा हूँ
SHIV SAFAR
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साथ इक दूजे के हम होते जनाब पास फिर इतने न ग़म होते जनाब मुझ सेे ही होती समुंदर में नमी दुख जो रो लेने से कम होते जनाब
SHIV SAFAR
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मख़मली बिस्तर तो घर में कल ही मैं ला दूँ मगर सोचता हूँ नींद आँखों में कहाँ से लाऊॅंगा
SHIV SAFAR
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मुद्दत से इतना ख़ामोश रहा हूँ मैं कि गूॅंगों से भी बात मैं अब कर सकता हूँ
SHIV SAFAR
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सुना है बा'द मरने के सभी अच्छा बताते हैं मुझे भी सबके होंठों से मेरी ता'रीफ़ सुननी है
SHIV SAFAR
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