sherKuch Alfaaz

रोज़ मिलने की तसल्ली न दिया कर मुझ को  जान ले लेगा किसी रोज़ बहाना तेरा

More from SALIM RAZA REWA

शादाब जिन की ख़ुशबू से हर इक गुलाब है रौशन चमक से जिन की 'रज़ा' आफ़ताब है सूरत वो जिस पे नाज़ है कुल काएनात को वो सूरत-ए-रसूल ख़ुदा की किताब है

SALIM RAZA REWA

0 likes

शादाब जिन की ख़ुशबू से हर इक गुलाब है रौशन चमक से जिन की 'रज़ा' आफ़ताब है सूरत वो जिस पे नाज़ है कुल काएनात को वो सूरत-ए-रसूल ख़ुदा की किताब है

SALIM RAZA REWA

0 likes

बन के मेहमान उस की ग़ुर्बत का लज़्ज़त-ए ग़म को चख के आया हूँ क़ैद करने को हर अदा उस की आँखें चौखट पे रख के आया हूँ

SALIM RAZA REWA

0 likes

ज़रा सी बात पे रिश्तों को कर दिया घाइल ज़रा सी बात को ले कर उदास बैठे हैं  

 तेरे बग़ैर हर इक शय की आँख पुरनम है 
 हमीं नहीं मह-ओ-अख़्तर उदास बैठे हैं

SALIM RAZA REWA

1 likes

उस बेर की मिठास तो बस जाने राम जी       शबरी ने जिस को चख के है मीठा बना दिया

SALIM RAZA REWA

1 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on SALIM RAZA REWA.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with SALIM RAZA REWA's sher.