सारे पेड़ क़लम में बना दूँ और समुंदर रख लूँ स्याही तब भी न लिख पाऊँगा मैं उस पे , ऐसी है मेरी माई
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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ज़िंदगी के प्यारे और उस की ख़ुशी के सात दिन कुछ अलग ही लगते हैं ना ? फरवरी के सात दिन
BR SUDHAKAR
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कभी आएगा और सब कुछ मिटा देगा ये मुझ को भी जो छुप के बैठा है अंदर मेरे, बाहर नहीं आया
BR SUDHAKAR
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घुँघरू जैसी आवाजें क्यो धड़कन में क्या तुम मेरे दिल में कत्थक करती हो
BR SUDHAKAR
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उस के बिन मर जाएँगे हम ने कहा था अब हो कोशिश क्यूँ? कि जब जीना ग़लत है
BR SUDHAKAR
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तोहफ़े इतने आए कि दिल भी ख़ाली नहीं अब तो और मेरी अलमारी तक की साँसें फूल गई
BR SUDHAKAR
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