साथ क्या हम चले कुछ क़दम दोस्त लगने लगे सारे ग़म बात चलने लगी आप की हँसते हँसते लगे रोने हम
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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कहानी तुम्हारी है हीरो हो तुम कहाँ कह रहे हम कि ज़ीरो हो तुम
Shubham Rai 'shubh'
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सुनाते नहीं थे सुनाना पड़ा है उसे दर्द मुझ को दिखाना पड़ा है मुहब्बत सफ़र है मुसाफ़िर हैं हम भी सो दिल को ठिकाना बनाना पड़ा है
Shubham Rai 'shubh'
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सिर झुकाऊँगा सब को भरोसा न था देख कर मैं तुझे ख़ुद-ब-ख़ुद झुक गया
Shubham Rai 'shubh'
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करूँँगा मैं क्या अब बताता नहीं हूँ सो अब पीठ पर ज़ख़्म खाता नहीं हूँ सभी लूट जाए भले आज कल पर किसी दर पे मैं सर झुकाता नहीं हूँ
Shubham Rai 'shubh'
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तेरे बा'द चाहेंगी आँखें उसी को खुली आँख से जो न सपने दिखाए
Shubham Rai 'shubh'
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