करूँँगा मैं क्या अब बताता नहीं हूँ सो अब पीठ पर ज़ख़्म खाता नहीं हूँ सभी लूट जाए भले आज कल पर किसी दर पे मैं सर झुकाता नहीं हूँ
Related Sher
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
435 likes
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
401 likes
ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
471 likes
सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
545 likes
More from Shubham Rai 'shubh'
तजरबा बस तुम्हें है जीने का हम ने तो ज़िंदगी गँवाई है दस्त के आप ही मुसाफ़िर हो ख़ाक हम ने कहाँ उड़ाई है
Shubham Rai 'shubh'
0 likes
अभी जंग जारी है हारा नहीं हूँ कि हथियार अपना उतारा नहीं हूँ ज़मीं है ये मेरी न ललकारो मुझ को सुनामी हूँ मैं कोई धारा नहीं हूँ
Shubham Rai 'shubh'
1 likes
पैर रख कर काँधे पर जिस के चढ़ना सीखा है तुम उसे समझा रहे सीढ़ी कैसी होती है
Shubham Rai 'shubh'
7 likes
बीतता वक़्त इक ख़जाना है क्या नया साल क्या पुराना है
Shubham Rai 'shubh'
6 likes
साथ क्या हम चले कुछ क़दम दोस्त लगने लगे सारे ग़म बात चलने लगी आप की हँसते हँसते लगे रोने हम
Shubham Rai 'shubh'
7 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Shubham Rai 'shubh'.
Similar Moods
More moods that pair well with Shubham Rai 'shubh''s sher.







