तजरबा बस तुम्हें है जीने का हम ने तो ज़िंदगी गँवाई है दस्त के आप ही मुसाफ़िर हो ख़ाक हम ने कहाँ उड़ाई है
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सच बताओ कि सच यही है क्या साँस लेना ही ज़िंदगी है क्या कुछ नया काम कर नई लड़की इश्क़ करना है बावली है क्या
Vikram Gaur Vairagi
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जो तुम्हें मंज़िल पे ले जाएँगी वो राहें अलग हैं मैं वो रस्ता हूँ कि जिस पर तुम भटक कर आ गई हो
Harman Dinesh
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रंग-ओ-रस की हवस और बस मसअला दस्तरस और बस यूँँ बुनी हैं रगें जिस्म की एक नस टस से मस और बस
Ammar Iqbal
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चाँद चेहरा ज़ुल्फ़ दरिया बात ख़ुशबू दिल चमन इक तुम्हें दे कर ख़ुदा ने दे दिया क्या क्या मुझे
Bashir Badr
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ये लोग पूछेंगे हमें ज़रा ख़राब होने दो अधर से चूम लेंगे बस मियाँ शराब होने दो
Shubham Rai 'shubh'
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खेल शतरंज के बदलते हैं दाव असली वज़ीर चलते हैं
Shubham Rai 'shubh'
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तुम नए नेता बने हो या गली तुम भूल आए हो फेंकने को कौन सा जुमला नया इस बार लाए हो
Shubham Rai 'shubh'
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बीतता वक़्त इक ख़जाना है क्या नया साल क्या पुराना है
Shubham Rai 'shubh'
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सब हो ये वक़्त-ए-रुख़्सत न हो हो मुलाक़ात आफ़त न हो तुम तसव्वुर में आती रहो दिल लगे तुम सेे नफ़रत न हो
Shubham Rai 'shubh'
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