सब को जोड़े से हम ने बिठाया मगर सब से आख़िर में हम ही खड़े रह गए
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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ज़िंदगी से सब को कुछ तो चाहिए तू मगर वो है जो सब को चाहिए साथ तेरे एक दिन ही काफ़ी है इतनी लंबी उम्र किस को चाहिए
Amit Rajvanshi 'Guru'
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यहाँ तो खेल सारा रौशनी का है यहाँ दीए के जलने से किसी को क्या
Amit Rajvanshi 'Guru'
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उन को क्या मालूम हम हर रोज़ क्या क्या सहते हैं अश्क पी जाते हैं और हर वक़्त हँसते रहते हैं मोमबत्ती बुझ गई वो भी बिना उस शख़्स के लोग ऐसे जन्मदिन को भी मुबारक कहते हैं
Amit Rajvanshi 'Guru'
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वैसे मेरा इरादा था ग़म भूल जाने का तुम रूबरू हुए तो इरादा बदल लिया
Amit Rajvanshi 'Guru'
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तुम अब भी याद करते हो उसे और कहते यूँँ थे ज़ियादा भी अगर लग जाए तो हफ़्ता लगेगा
Amit Rajvanshi 'Guru'
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