यहाँ तो खेल सारा रौशनी का है यहाँ दीए के जलने से किसी को क्या
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मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे
Ali Zaryoun
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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ये जो हिजरत के मारे हुए हैं यहाँ अगले मिसरे पे रो के कहेंगे कि हाँ
Ali Zaryoun
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पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है जाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है
Meer Taqi Meer
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निगाह-ए-शोख़ का क़ैदी नहीं है कौन यहाँ किसे तमन्ना नहीं फूल चूमने को मिले
Aks samastipuri
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ज़िंदगी से सब को कुछ तो चाहिए तू मगर वो है जो सब को चाहिए साथ तेरे एक दिन ही काफ़ी है इतनी लंबी उम्र किस को चाहिए
Amit Rajvanshi 'Guru'
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वो बात और है जो मैं ग़मज़दा नहीं सब की तरह मेरा भी इक काश रह गया
Amit Rajvanshi 'Guru'
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वो बिछड़ गया ये दुख नहीं दुख ये है कि देखना पड़ा
Amit Rajvanshi 'Guru'
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वो और दिन थे जब कोई पूछता न था रहते हैं आज सब मेरे इंतिज़ार में
Amit Rajvanshi 'Guru'
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तेरे काँधे पे हाथ मेरा मैं रख तो दूँ लेकिन मेरे छूने भर से तेरा कुर्ता मैला लगेगा
Amit Rajvanshi 'Guru'
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