सब महँगे ज़ेवरात की क़ीमत घटाऊँगा सोने का नाम आज से पीतल करूँँगा मैं
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होगा कोई ऐसा भी कि 'ग़ालिब' को न जाने शाइ'र तो वो अच्छा है प बदनाम बहुत है
Mirza Ghalib
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आते आते मिरा नाम सा रह गया उस के होंटों पे कुछ काँपता रह गया
Waseem Barelvi
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उँगली पे गिन रहा हूँ सभी दोस्तों के नाम लेकिन तुम्हारे नाम पे हम गिन रहा हूँ मैं
Sarfraz Arish
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ले कर ख़ुदा का नाम जो इक बे-क़ुसूर को शैतान कह रहा है ये शैतान कौन है
nakul kumar
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हाए वो इश्क़ छुपाने के ज़माने 'मोहन' याद आता है ग़लत नाम से नंबर रखना
Balmohan Pandey
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वो इक नदी जो कभी तेज़-तेज़ बहती थी वो आज रेत के मैदान सी बिछी हुई है मैं इक दरख़्त था 'अशरफ़' किसी ज़माने में खिज़ां के कहरस अब ठूँठ ही बची हुई है
Ashraf Ali
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जो भी मुझ में बाक़ी है गड़बड़ी निकालूँगा चाबियाँ बनाऊँगा, हथकड़ी निकालूँगा ये जो तुम शरीफ़ों को धौंस देते फिरते हो एक दिन तुम्हारी भी हेकड़ी निकालूँगा
Ashraf Ali
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सारी दुनिया को अजनबी कर के ख़ुश हूँ ख़ल्वत से दोस्ती कर के
Ashraf Ali
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पुतलियों में घुला समुंदर है मोतियों की दुकान आँखें हैं आप तहक़ीक़ ही नहीं करते सब ख़ज़ानों की खान आँखें हैं
Ashraf Ali
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है नाज़ मुझ को आप मेरे राब्ते में हैं मेरे भी हिस्से आ गए कुछ शानदार लोग ज़िंदादिली का ज़िक्र कहीं हो रहा हो तो सुनते ही याद आते हैं बचपन के यार लोग
Ashraf Ali
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