सबकी अपनी-अपनी मर्ज़ी होती हैं जो यहाँ से अब जैसा चाहें वैसा चुने उस की मर्ज़ी हैं पत्थर को फूल समझे या फिर अपने फूल से बस काँटा चुने
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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ये फूल तेरे बाग़ के बस नाम के ही फूल हैं तुम खिल रहे हो जैसे वैसे कोई भी खिलता नहीं
Praveen Bhardwaj
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मेरी जाँ कोई ज़ुल्म न कर ख़ुदा के लिए यहाँ कोई ग़ुरूर नहीं रहता सदा के लिए
Praveen Bhardwaj
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तुम को नज़र अंदाज़ करता ज़िंदगी में करता नइँ तुम कर रहे जो इश्क़ में मैं दुश्मनी में करता नइँ
Praveen Bhardwaj
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कोई कब समझता है कितनी दूर है मंज़िल कितना दूर हम सेे हम कितना दूर दिल से दिल
Praveen Bhardwaj
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कोई ग़म है तो बता के देख मुझे या अपने दिल से लगा के देख मुझे ग़ैरों की बातों पर मत यक़ीन कर तू कभी ख़ुद भी तो आ के देख मुझे
Praveen Bhardwaj
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