सभी पर वक़्त होता है गुनाहों से करें तौबा दया से ज़िन्दगी सबकी अज़ाबों सी नहीं होती
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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अब उस सेे दोस्ती है जिस सेे कल मुहब्बत थी अब इस सेे ज़्यादा बुरा वक़्त कुछ नहीं है दोस्त
Vishal Singh Tabish
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मेरी तन्हाई देखेंगे तो हैरत ही करेंगे लोग मोहब्बत छोड़ देंगे या मोहब्बत ही करेंगे लोग
Ismail Raaz
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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मैं किस तरह ख़ुश हूँ बर्बाद यहाँ होकर मेरी ख़ुशियों तुम पर अफ़सोस किया जाए
Sagar Sahab Badayuni
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यहाँ पर मसअला मुश्किल नहीं होता जुदा करना कभी तो आशिक़ों के हाल पर जा कर दुआ करना
Sagar Sahab Badayuni
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वो ख़्वाब भी जिस का मुझे आता नहीं दिल से कभी जो भी गया आता नहीं
Sagar Sahab Badayuni
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जिसे तुम छोड़ आए वो ज़माना और था सागर तुम्हें अब इस ज़माने से रफ़ाक़त भी नहीं मिलनी
Sagar Sahab Badayuni
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यही है ख़्वाब मुस्तक़बिल बने तू ही हमारा अब अकेला सिर्फ़ दिल मेरा सहारा हो नहीं सकता
Sagar Sahab Badayuni
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