सबका लिखा सब अच्छा सब के वास्ते मुमकिन नहीं सब को मिलेंगे मन मुताबिक़ रास्ते मुमकिन नहीं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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वो समुंदर है वो प्यासा ही रखेगा मैं सिमट जाऊँगा तुझ में ,हूँ मैं तालाब
"Dharam" Barot
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साथ होता ही नहीं सब का यहाँ हौसला ही साथ होता था मेरा
"Dharam" Barot
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पता सब को ही छत, दीवार का ये दुख पता किस को पिलर को होता था ये दुख बड़े जब होते है बच्चे पता चलता उन्हें क्या होता है माँ बाप का ये दुख
"Dharam" Barot
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मैं कहूँगा और कुछ ही वो सुनेगा और कुछ ही जानते हैं सब यही रिश्ता मियाँ- बीवी का सच्चा
"Dharam" Barot
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थी कुछ से प्रीति था कुछ से हमारा बैर कभी अपना कभी अपना बना था ग़ैर कठिन हर रास्ता मंज़िल दिखाएगा मिलेगी क़ामयाबी तुम चलाओ पैर
"Dharam" Barot
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