पता सब को ही छत, दीवार का ये दुख पता किस को पिलर को होता था ये दुख बड़े जब होते है बच्चे पता चलता उन्हें क्या होता है माँ बाप का ये दुख
Related Sher
तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
339 likes
उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
361 likes
मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
271 likes
ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
174 likes
ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
394 likes
More from "Dharam" Barot
वो ख़ुद को शे'र माने बैठा देखो बताओ ज़िन्दगी सर्कस है उस को
"Dharam" Barot
1 likes
वो समुंदर है वो प्यासा ही रखेगा मैं सिमट जाऊँगा तुझ में ,हूँ मैं तालाब
"Dharam" Barot
1 likes
न रामायण का मक़्सद राम को सब को बताना था हाँ रामायण का मक़्सद राम हर घर में बनाना था
"Dharam" Barot
1 likes
पिता बच्चों की हर विश पूरी करने में लगा है गगन जैसी भी ख़्वाहिश पूरी करने में लगा है
"Dharam" Barot
1 likes
लोग भूखे हैं मोहब्बत के यहाँ पर बेच नफ़रत क्यूँ रहे हो तुम जहाँ पर बाँट दोगे इस जहाँ को दो धड़ों में फिर बताओ अम्न आना है कहाँ पर
"Dharam" Barot
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on "Dharam" Barot.
Similar Moods
More moods that pair well with "Dharam" Barot's sher.







