सब्र का है इम्तिहाँ और जब्र भी है इंतिहा पास वो आते नहीं और दूर भी जाने न दें
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वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता
Parveen Shakir
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मत पूछो कितना ग़मगीं हूँ गंगा जी और जमुना जी ज़्यादा तुम को याद नहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी अमरोहे में बान नदी के पास जो लड़का रहता था अब वो कहाँ है मैं तो वहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी
Jaun Elia
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एक सीता की रिफ़ाक़त है तो सब कुछ पास है ज़िंदगी कहते हैं जिस को राम का बन-बास है
Hafeez Banarasi
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मैं समझा था तुम हो तो क्या और माँगू मेरी ज़िन्दगी में मेरी आस तुम हो ये दुनिया नहीं है मेरे पास तो क्या मेरा ये भरम था मेरे पास तुम हो
Khalil Ur Rehman Qamar
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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मिरे ख़िलाफ़ ही सब दस्तख़त हुए आख़िर मैं चुप रहा तो गुनहगार मुझ को माना है
arjun chamoli
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सय्याद मिरा करने लगा मुझ सेे गिला ये इस क़ैद-ए-मोहब्बत से रवानी ही नहीं है
arjun chamoli
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वो साँप को बुरा कहते हैं ख़ुद आस्तीन में रहते हैं
arjun chamoli
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पता मुझ को तेरा ये दिल मुझी से इश्क़ को लरज़े करूँँ मैं क्या लगी है भीड़ लैलाओं की पहले से
arjun chamoli
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फ़क़त इतनी तमन्ना साथ तेरा पाने की मुझ को मिरा दिल कह रहा जीना नहीं तेरे बिना अब तो
arjun chamoli
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