सड़ गया रक्खा हुआ पानी भी ख़ुद ही कब तलक़ हम आप को यूँँ साथ रखते
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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यार कुछ ना है हमारे पास साइल हम दुआएँ भी नहीं देते किसी को
Shiv
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ये साल भी काटा तिरी उम्मीद पर उम्मीद पर तू फिर खरा उतरा नहीं
Shiv
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यार देखो और हाथों को हिलाओ हैफ़ कोई रह रहा है बादलों में
Shiv
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ये ग़ज़ल ये शे'र औ' उस शख़्स की याद हम उसे ख़ुद से अलग रख ही न पाए
Shiv
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जो फूल तुम ने कान पर रक्खे नहीं वो जी रहे हैं बे-रुख़ी से काट कर
Shiv
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