ये ग़ज़ल ये शे'र औ' उस शख़्स की याद हम उसे ख़ुद से अलग रख ही न पाए
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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जो दुनिया को सुनाई दे उसे कहते हैं ख़ामोशी जो आँखों में दिखाई दे उसे तूफ़ान कहते हैं
Rahat Indori
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बस ये दिक़्क़त है भुलाने में उसे उस के बदले में किस को याद करें
Fahmi Badayuni
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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सड़ गया रक्खा हुआ पानी भी ख़ुद ही कब तलक़ हम आप को यूँँ साथ रखते
Shiv
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इक दुख रहेगा ज़िन्दगी भर का हमें हिस्से हमारे तू नहीं आया कभी
Shiv
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ये साल भी काटा तिरी उम्मीद पर उम्मीद पर तू फिर खरा उतरा नहीं
Shiv
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इस फ़रवरी भले न मिल पाए आगे की फ़रवरी मिलेंगे हम
Shiv
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यक़ीनन तुझे खोने वाले सभी फ़िक्र से मर रहे हैं
Shiv
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