इस फ़रवरी भले न मिल पाए आगे की फ़रवरी मिलेंगे हम
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे
Mirza Ghalib
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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ये साल भी काटा तिरी उम्मीद पर उम्मीद पर तू फिर खरा उतरा नहीं
Shiv
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ये ग़ज़ल ये शे'र औ' उस शख़्स की याद हम उसे ख़ुद से अलग रख ही न पाए
Shiv
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निकाले गए तेरे दिल से तिरा शहर भी छोड़ आए
Shiv
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इज़हार तक उस को न कर पाए कभी क्या आशिक़ी करते रहे हम लोग ये
Shiv
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यार कुछ ना है हमारे पास साइल हम दुआएँ भी नहीं देते किसी को
Shiv
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