इज़हार तक उस को न कर पाए कभी क्या आशिक़ी करते रहे हम लोग ये
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वो झूठ बोल रहा था बड़े सलीक़े से मैं ए'तिबार न करता तो और क्या करता
Waseem Barelvi
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हम ने अब तक गाल बचा के रक्खे हैं क्या तुम ने भी गुलाल बचा के रक्खे हैं
Anand Raj Singh
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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ये ग़ज़ल ये शे'र औ' उस शख़्स की याद हम उसे ख़ुद से अलग रख ही न पाए
Shiv
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ये साल भी काटा तिरी उम्मीद पर उम्मीद पर तू फिर खरा उतरा नहीं
Shiv
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सभी से सिर्फ़ हम लानत की ख़ातिर ही हज़ारों बार उस पर शे'र कहते हैं
Shiv
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तेरे दुख में मिले हैं हम तुझे दुख से बचाएंगे
Shiv
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यार कुछ ना है हमारे पास साइल हम दुआएँ भी नहीं देते किसी को
Shiv
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