सभी से सिर्फ़ हम लानत की ख़ातिर ही हज़ारों बार उस पर शे'र कहते हैं
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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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क्या बोला मुझे ख़ुद को तुम्हारा नहीं कहना ये बात कभी मुझ सेे दुबारा नहीं कहना ये हुक़्म भी उस जान से प्यारे ने दिया है कुछ भी हो मुझे जान से प्यारा नहीं कहना
Ali Zaryoun
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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या'नी तुम वो हो वाक़ई हद है मैं तो सच-मुच सभी को भूल गया
Jaun Elia
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उस सेे कहो इक बार मेरा नाम पुकारे उस के बिना साँसों का रिदम टूट रहा है
Ankit Maurya
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ये ग़ज़ल ये शे'र औ' उस शख़्स की याद हम उसे ख़ुद से अलग रख ही न पाए
Shiv
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उसे कम कर रहा हूँ दिन-ब-दिन थोड़ा उसे इक दम से भूला जा नहीं सकता
Shiv
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यार देखो और हाथों को हिलाओ हैफ़ कोई रह रहा है बादलों में
Shiv
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रात भर चाँद को देखते रह गए चाँद की शक्ल तुझ सी बना दी गई
Shiv
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इक जलपरी को जाल फेंके थे सभी फँसते गए हम सब मियाँ उस जाल में
Shiv
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