ये साल भी काटा तिरी उम्मीद पर उम्मीद पर तू फिर खरा उतरा नहीं
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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तुम सेे मिल कर इतनी तो उम्मीद हुई है इस दुनिया में वक़्त बिताया जा सकता है
Manoj Azhar
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ज़िक्र हर-सू बिखर गया उस का कोई दीवाना मर गया उस का उस ने जी भर के मुझ को चाहा था और फिर जी ही भर गया उस का
Zubair Ali Tabish
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यार कुछ ना है हमारे पास साइल हम दुआएँ भी नहीं देते किसी को
Shiv
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ये ग़ज़ल ये शे'र औ' उस शख़्स की याद हम उसे ख़ुद से अलग रख ही न पाए
Shiv
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इस फ़रवरी भले न मिल पाए आगे की फ़रवरी मिलेंगे हम
Shiv
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उसे कम कर रहा हूँ दिन-ब-दिन थोड़ा उसे इक दम से भूला जा नहीं सकता
Shiv
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मेरा उस शख़्स पे मरना तो लाज़िम है मिरा जीने को भी अब जी नहीं करता
Shiv
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