सहीह से मैं तो अपना रंज-ओ-अलम दिखा भी नहीं पाया अगरचे मैं ने वो सब किया जो जुदाई में लोग करते हैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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ज़िंदगी की सीख मुफ़्त में कहाँ से लाइए जाइए जनाब आप पहले दिल लुटाइए
Naresh sogarwal 'premi'
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याद आई ख़ूब रोने दिया हम ने ख़ुद को पर ग़म में कभी रक़ीब की इस्तिदआ की नहीं
Naresh sogarwal 'premi'
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तुम को भी एहसास हो मुझ को हमेशा खोने का बीते लम्हों में मुझे तुम रोज़ ही देखा करो
Naresh sogarwal 'premi'
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मेरी मजबूरी पे तोहमत ही लगाने आओ जान फिर से किसी दिन मुझ को रुलाने आओ
Naresh sogarwal 'premi'
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तुम से इस दिल को तसल्ली है करें भी क्या हम हम से था इश्क़ जिसे हम ने उसे छोड़ दिया
Naresh sogarwal 'premi'
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