तुम को भी एहसास हो मुझ को हमेशा खोने का बीते लम्हों में मुझे तुम रोज़ ही देखा करो
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ये समय जो है कि मुझ सेे अब तो कटता भी नहीं और ऐसा भी नहीं मैं जो कि लिख नहीं रहा
Naresh sogarwal 'premi'
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ये हुनर भी लिखने का मुझ में तो नहीं था पर इश्क़ जो भी करते हैं शा'इरी ही करते हैं
Naresh sogarwal 'premi'
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ये हमदर्दी तो मानव को बना देती है बेचारा करो तारीफ़ मेरी ज़ख़्म की ही क्यूँ न हो चाहे
Naresh sogarwal 'premi'
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रहता हूँ आठों पहर तुझ में ही लेकिन मिलने को इक पास लम्हा भी नहीं
Naresh sogarwal 'premi'
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मेरी सुब्ह और रात का विवाद तो ये है मुझ को लगती है सिगार सोने और जगने में
Naresh sogarwal 'premi'
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