ये हमदर्दी तो मानव को बना देती है बेचारा करो तारीफ़ मेरी ज़ख़्म की ही क्यूँ न हो चाहे
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तुम अगर साथ देने का वा'दा करो मैं यूँँही मस्त नग़्में लुटाता रहूँ तुम मुझे देख कर मुस्कुराती रहो मैं तुम्हें देख कर गीत गाता रहूँ
Sahir Ludhianvi
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मैं ने बस इतना पूछा था क्या देखते हो भला मैं ने ये कब कहा था मुझे देखना छोड़ दो गीली मिट्टी की ख़ुशबू मुझे सोने देती नहीं मेरे बालों में तुम उँगलियाँ फेरना छोड़ दो
Tajdeed Qaiser
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ज़मीं पे घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं हमारी ख़ुश-नसीबी है कि हम भारत में रहते हैं
Mehshar Afridi
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"उस के हाथ में फूल है" मत कहिए, कहिए उस का हाथ है फूल को फूल बनाने में
Charagh Sharma
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तुम उन के वा'दे का ज़िक्र उन से क्यूँँ करो 'ग़ालिब' ये क्या कि तुम कहो और वो कहें कि याद नहीं
Mirza Ghalib
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ज़िंदगी की सीख मुफ़्त में कहाँ से लाइए जाइए जनाब आप पहले दिल लुटाइए
Naresh sogarwal 'premi'
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यही था हक़ तिरा क्या वो यही मुहब्बत थी मना किया था तुझे और तू ये मान गई
Naresh sogarwal 'premi'
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ये हुनर भी लिखने का मुझ में तो नहीं था पर इश्क़ जो भी करते हैं शा'इरी ही करते हैं
Naresh sogarwal 'premi'
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निशात-ओ-ऐश-ए-अलम की न ही दवा लीजे अगर कमाना है इल्म इस की फिर सज़ा लीजे
Naresh sogarwal 'premi'
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सहीह से मैं तो अपना रंज-ओ-अलम दिखा भी नहीं पाया अगरचे मैं ने वो सब किया जो जुदाई में लोग करते हैं
Naresh sogarwal 'premi'
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