यही था हक़ तिरा क्या वो यही मुहब्बत थी मना किया था तुझे और तू ये मान गई
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
Nida Fazli
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मुरली छूटी शंख बजा रास तजा फिर युद्ध सजा क्या पीछे क्या आगे है सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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किस से इज़हार-ए-मुद्दआ कीजे आप मिलते नहीं हैं क्या कीजे
Jaun Elia
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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ज़िंदगी की सीख मुफ़्त में कहाँ से लाइए जाइए जनाब आप पहले दिल लुटाइए
Naresh sogarwal 'premi'
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तंग आ चुके हैं अपनी ही बेकली से फिर हम ठुकरा न दें कहीं ख़ुद को बेख़ुदी से फिर हम
Naresh sogarwal 'premi'
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वो मुझ सेे अकस्मात भी नइँ मिला मिरे ही मुक़द्दर में सँजोग नइँ
Naresh sogarwal 'premi'
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याद आई ख़ूब रोने दिया हम ने ख़ुद को पर ग़म में कभी रक़ीब की इस्तिदआ की नहीं
Naresh sogarwal 'premi'
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सौ शिकायतें हैं तुम सेे इक का भी गिला नहीं हो के रह गया है कुछ जिसे असर हुआ नहीं
Naresh sogarwal 'premi'
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