सैकड़ों मील की थकन जैसे नीम की छाँव से चली जाए लाख शिकवे गिले थे दुनिया से फिर मेरी ज़िंदगी में तुम आए
Related Sher
इसी से जान गया मैं कि बख़्त ढलने लगे मैं थक के छाँव में बैठा तो पेड़ चलने लगे मैं दे रहा था सहारे तो इक हुजूम में था जो गिर पड़ा तो सभी रास्ता बदलने लगे
Farhat Abbas Shah
71 likes
मेरे आँगन में एक बूढ़ा पेड़ छाँव भी देता है, दुआएँ भी
Ankit Maurya
52 likes
लहजा कि जैसे सुब्ह की ख़ुश्बू अज़ान दे जी चाहता है मैं तिरी आवाज़ चूम लूँ
Bashir Badr
52 likes
जैसे मेरी निगाह ने देखा न हो कभी महसूस ये हुआ तुझे हर बार देख कर
Shad Azimabadi
56 likes
भले ही सैकड़ों मजबूरियाँ हों बेवफ़ाई की मगर तुम वज्ह मत बनना किसी सूनी कलाई की
Harsh saxena
56 likes
More from ZARKHEZ
वो एक लम्हा जो बेदारियों का ज़ामिन है जब आँख लगने लगे तब अज़ान देता है
ZARKHEZ
1 likes
हमारी आँख में पहले तो मिट्टी झोंक जाएँगे वही फिर काँच के आँसू इकट्ठे करने आएँगे अगर ज़ाहिर करूँँगा आसमाँ पर ख़्वाहिशें अपनी मुझे इस बात का डर है सितारे टूट जाएँगे
ZARKHEZ
2 likes
तुम्हें छूने को हूँ बेताब लेकिन हक़ीक़त हाथ में उलझी हुई है
ZARKHEZ
3 likes
ये तिरे हिज्र का करिश्मा है मैं ने काटा जो साल दिन भर में
ZARKHEZ
2 likes
उन दरख़्तों से दूर हो जाओ जिन दरख़्तों में छाँव होती है
ZARKHEZ
2 likes
Similar Writers
Our suggestions based on ZARKHEZ.
Similar Moods
More moods that pair well with ZARKHEZ's sher.







