सालिम पनाहें कोई छोड़ेगा क्यूँँ मगर हम लाचार हो के तेरी बाँहों से आज निकले
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दिल से साबित करो कि ज़िंदा हो साँस लेना कोई सुबूत नहीं
Fahmi Badayuni
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उलझ कर के तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँँ आबाद हो जाऊँ कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ मैं यमुना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ
Ashraf Jahangeer
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सौ सौ उमीदें बँधती है इक इक निगाह पर मुझ को न ऐसे प्यार से देखा करे कोई
Allama Iqbal
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
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ज़ियादा शक की गुंजाइश नहीं होगी यक़ीं मानो तुम्हारे हिस्से का तुम को समय और फ़ासला दूँगा
Milan Gautam
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तमाम-उम्र अगर हिज्र ही नसीब में है तो एक दिन में मिरी सारी उम्र कट जाए
Milan Gautam
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पहले दिल जुड़ने देना गहराई से जिस्मों को पहले यक-सार नहीं करना
Milan Gautam
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ये ज़ुल्मतें कि चराग़ों पे हावी हो रही हैं वो हुस्न सामने आए सियाही छट जाए
Milan Gautam
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प्यार मोहब्बत के यातायात में सफ़र करना इतनी चौड़ी सबके दिल की सड़क नहीं होती
Milan Gautam
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