तमाम-उम्र अगर हिज्र ही नसीब में है तो एक दिन में मिरी सारी उम्र कट जाए
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ये ज़ुल्मतें कि चराग़ों पे हावी हो रही हैं वो हुस्न सामने आए सियाही छट जाए
Milan Gautam
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ज़ियादा शक की गुंजाइश नहीं होगी यक़ीं मानो तुम्हारे हिस्से का तुम को समय और फ़ासला दूँगा
Milan Gautam
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ये फ़क़त माँग में भरने से शाज़ सिन्दूर हो जाता है
Milan Gautam
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तुम सुधा बन जाओ और चंदर मैं बन जाऊँ तुम्हारा बस कोई प्रमिला न अपने बीच आए ज़िंदगी-भर
Milan Gautam
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तू है तो है ज़ियाई ज़िंदगी में मेरी यूँँ क़ाएम कहाँ फिर से मैं तुझ सा नूर-गीं पाऊँगा तेरे बिन
Milan Gautam
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