सलीक़ा तो नहीं मालूम हम को दीद का लेकिन झुकाती है नज़र को जब नज़र भर देखते हैं हम
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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यार अनोखा जादू है याँ उस की कोमल बाँहों में मुरझाए चेहरे खिल जाते हैं बस इक आलिंगन से
Sandeep dabral 'sendy'
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यार अगर वो हाँ कह दे तो ख़ुद को आऊँ सौंप उसे झुमका तो बस मामूली नज़राना है उस की ख़ातिर
Sandeep dabral 'sendy'
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ये मानो न मानो यहाँ अपना कल सुन रहा है ये पढ़ने की इस उम्र में जो ग़ज़ल सुन रहा है
Sandeep dabral 'sendy'
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यादों के जंगल में आता नइँ याँ गाहे पतझड़ का मौसम सो बूढ़ी आँखों में भी यादों के पेड़ हरे भरे मिलते हैं
Sandeep dabral 'sendy'
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याद यहाँ सिरहाने मेरे आ कर बैठा करती है ग़ुस्से में वो तनकर भौंहें रोब जमाया करती है
Sandeep dabral 'sendy'
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