समझा कर वो दोस्त थी मेरी जैसे कि वो अब दोस्त तेरा है
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे
Mirza Ghalib
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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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उसे जाना था तो जाने दिया रोका नहीं मैं ने ज़बरदस्ती का रिश्ता अब मुझे उस सेे नहीं रखना
Vikas Shah musafir
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सुना है ये ग़रीबी हर सफ़र को रोक सकती है दिसम्बर जा रहा है रोक ले जो रोक सकती है
Vikas Shah musafir
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तुम कभी नहीं आना चाहती हो मेरे घर दुख कभी नहीं होता गर मिला नहीं होता
Vikas Shah musafir
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पता है तुम को उस दिन क्या हुआ था किसी ने तोड़ डाला था मेरा दिल
Vikas Shah musafir
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जो अस्ली ग़ज़ल है यही है "ग़ज़ल" वो मगर ये "ग़ज़ल" जो है अस्ली नहीं है
Vikas Shah musafir
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