उसे जाना था तो जाने दिया रोका नहीं मैं ने ज़बरदस्ती का रिश्ता अब मुझे उस सेे नहीं रखना
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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समझा कर वो दोस्त थी मेरी जैसे कि वो अब दोस्त तेरा है
Vikas Shah musafir
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पता है तुम को उस दिन क्या हुआ था किसी ने तोड़ डाला था मेरा दिल
Vikas Shah musafir
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एक ज़िद्दी लड़का हासिल आपगा को कर रहा और घूरता भी जा रहा है उस फ़लक को ग़ौर से अब
Vikas Shah musafir
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मेरे वालिद पे क़र्ज़ा था मेरी ता'लीम को ले कर उसी लाला का अब मुझ को तो कर्ज़ा भी चुकाना है
Vikas Shah musafir
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इश्क़ करते थे तभी सहना पड़ा मुझ को, नहीं तो दूर रहते जानते होते कि तुम ऐसा करोगी
Vikas Shah musafir
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