मेरे वालिद पे क़र्ज़ा था मेरी ता'लीम को ले कर उसी लाला का अब मुझ को तो कर्ज़ा भी चुकाना है
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तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक़ है मेरी तरह उसे भी किताबों का शौक़ है
Charagh Sharma
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इतना संगीन पाप कौन करे मेरे दुख पर विलाप कौन करे चेतना मर चुकी है लोगों की पाप पर पश्चाताप कौन करे
Azhar Iqbal
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एक दिन की ख़ुराक है मेरी आप के हैं जो पूरे साल के दुख
Varun Anand
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प्यास अगर मेरी बुझा दे तो मैं जानू वरना तू समुंदर है तो होगा मेरे किस काम का है
Rahat Indori
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मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे
Mirza Ghalib
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तुम कभी नहीं आना चाहती हो मेरे घर दुख कभी नहीं होता गर मिला नहीं होता
Vikas Shah musafir
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उसे जाना था तो जाने दिया रोका नहीं मैं ने ज़बरदस्ती का रिश्ता अब मुझे उस सेे नहीं रखना
Vikas Shah musafir
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समझा कर वो दोस्त थी मेरी जैसे कि वो अब दोस्त तेरा है
Vikas Shah musafir
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बस ना कर दो मुझे चुप हो के चला जाऊँगा मैं मुसाफ़िर हूँ तलैयुल से चला जाऊँगा एक के होते हुए भी किसी और की चाहत ऐसी उल्फ़त से अलग हो के चला जाऊँगा
Vikas Shah musafir
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मुझ को भी ऐसी आँख अता कर मेरे ख़ुदा अंधा हो कर भी मुझ को ये नज़्ज़ारगी मिले
Vikas Shah musafir
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