सुना है ये ग़रीबी हर सफ़र को रोक सकती है दिसम्बर जा रहा है रोक ले जो रोक सकती है
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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आप की आँखें अगर शे'र सुनाने लग जाएँ हम जो ग़ज़लें लिए फिरते हैं, ठिकाने लग जाएँ
Rehman Faris
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जब चाहें सो जाते थे हम, तुम सेे बातें कर के तब उल्टी गिनती गिनने से भी नींद नहीं आती है अब इश्क़ मुहब्बत पर ग़ालिब के शे'र सुनाए उस को जब पहले थोड़ा शरमाई वो फिर बोली इस का मतलब?
Tanoj Dadhich
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झिझकता हूँ उसे इल्ज़ाम देते कोई उम्मीद अब भी रोकती है
Shariq Kaifi
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उस के लबों को चूम के ये इल्म हो गया मुझ को वो ज़हर के बिना भी मार सकती है
Harsh saxena
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समझा कर वो दोस्त थी मेरी जैसे कि वो अब दोस्त तेरा है
Vikas Shah musafir
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तुम कभी नहीं आना चाहती हो मेरे घर दुख कभी नहीं होता गर मिला नहीं होता
Vikas Shah musafir
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उसे जाना था तो जाने दिया रोका नहीं मैं ने ज़बरदस्ती का रिश्ता अब मुझे उस सेे नहीं रखना
Vikas Shah musafir
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पता है तुम को उस दिन क्या हुआ था किसी ने तोड़ डाला था मेरा दिल
Vikas Shah musafir
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इश्क़ करते थे तभी सहना पड़ा मुझ को, नहीं तो दूर रहते जानते होते कि तुम ऐसा करोगी
Vikas Shah musafir
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