उस के लबों को चूम के ये इल्म हो गया मुझ को वो ज़हर के बिना भी मार सकती है
Related Sher
हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
333 likes
उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
361 likes
कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
321 likes
हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
157 likes
मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
Jaun Elia
314 likes
More from Harsh saxena
हासिल न कर पाया तुझे मैं मिन्नतों के बा'द भी उम्मीद सेंटा से लगाना लाज़मी भी है मिरा
Harsh saxena
1 likes
दुनिया के भरम को कुछ यूँँ तोड़ दिया मैं ने इस बार नसीबों का रुख़ मोड़ दिया मैं ने
Harsh saxena
1 likes
इस ज़िंदगानी की ग़ज़ल का क़ाफ़िया सा लगता है उस के बिना तो जैसे पूरा घर बुझा सा लगता है यूँँ तो कोई मंदिर नहीं दुनिया में उस के नाम का लेकिन न जाने क्यूँ मुझे वो देवता सा लगता है
Harsh saxena
4 likes
इस ज़माने में भी इक लड़का तुम्हें यूँँ चाहता है अपने रब से वो तुम्हारी जैसी बेटी माँगता है
Harsh saxena
4 likes
दर-ब-दर ढूँढ़ रहे हैं जिसे अरसे से हम शख़्स वो मेरी ही आँखों में छिपा बैठा है
Harsh saxena
2 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Harsh saxena.
Similar Moods
More moods that pair well with Harsh saxena's sher.







