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मेरी बाँहों में बहकने की सज़ा भी सुन ले अब बहुत देर में आज़ाद करूँँगा तुझ को

Jaun Elia

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अब के हम तर्क-ए-रसूमात कर के देखते हैं बीच वालों के बिना बात कर के देखते हैं इस सेे पहले कि कोई फ़ैसला तलवार करे आख़िरी बार मुलाक़ात कर के देखते हैं

Abrar Kashif

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गुजर चुकी जुल्मते शब-ए-हिज्र, पर बदन में वो तीरगी है मैं जल मरुंगा मगर चिरागों के लो को मध्यम नहीं करूँगा ये अहद ले कर ही तुझ को सौंपी थी मैं ने कलबौ नजर की सरहद जो तेरे हाथों से क़त्ल होगा मैं उस का मातम नहीं करूँगा

Tehzeeb Hafi

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मेरी अक्ल-ओ-होश की सब हालतें तुम ने साँचे में जुनूँ के ढाल दी कर लिया था मैं ने अहद-ए-तर्क-ए-इश्क़ तुम ने फिर बाँहें गले में डाल दी

Jaun Elia

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करूँँगा क्या जो मोहब्बत में हो गया नाकाम मुझे तो और कोई काम भी नहीं आता

Ghulam Mohammad Qasir

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