सपनों में देखा करते हैं तुम को और तो वरना फिर कोई ज़रिया नइँ
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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मिलते थे जिन में हर शब हम वो सपने भी अब आते नइँ
Prakamyan Gautam
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उस के जैसों की होती है दुनिया हम जैसों का तो कमरा होता है
Prakamyan Gautam
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उस पैकर में शामिल है वो सब का सब जो जो लड़कों की कमज़ोरी होती है
Prakamyan Gautam
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वो सब जो बस तुम से कहना था मुझ को कहता फिरता हूँ पूरी दुनिया से मैं
Prakamyan Gautam
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वैसे तो सब को अच्छा लगता है पर उस को ये फूल बुरा लगता है
Prakamyan Gautam
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