साथ में हैं कौन बंदे कौन हैं दुश्मन तुम्हारे बस नज़र भर देख कर के दो सफ़ों में बाँट देते
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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ये पता चला हमें तेरे इंतिज़ार में थोड़ी देर होने में कितनी देर लगती है
Subhash Ehsaas
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इस दफ़ा भी जश्न-ए-आज़ादी नहीं है इस दफ़ा भी हम किसी की क़ैद में हैं
Subhash Ehsaas
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है 'सुभाष एहसास' की सोहबत में दुनिया कुछ अकड़ में है मगर झूठी नहीं है
Subhash Ehsaas
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राएगानी के अगर मानी समझने हैं तो आना बा'द तेरे तुझ को हर इक शय यहाँ उजड़ी मिलेगी
Subhash Ehsaas
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कुछ नहीं है ये मोहब्बत कहने वालो सोच लो ये तुम को भी इक रोज़ ख़्वाबों में कोई लड़की मिलेगी
Subhash Ehsaas
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