है 'सुभाष एहसास' की सोहबत में दुनिया कुछ अकड़ में है मगर झूठी नहीं है
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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ये पता चला हमें तेरे इंतिज़ार में थोड़ी देर होने में कितनी देर लगती है
Subhash Ehsaas
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कुछ नहीं है ये मोहब्बत कहने वालो सोच लो ये तुम को भी इक रोज़ ख़्वाबों में कोई लड़की मिलेगी
Subhash Ehsaas
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इस दफ़ा भी जश्न-ए-आज़ादी नहीं है इस दफ़ा भी हम किसी की क़ैद में हैं
Subhash Ehsaas
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राएगानी के अगर मानी समझने हैं तो आना बा'द तेरे तुझ को हर इक शय यहाँ उजड़ी मिलेगी
Subhash Ehsaas
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हम किसी की मानते हैं ही नहीं है हमारे साथ में ये मसअला
Subhash Ehsaas
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