शहर-ए-बाराँ में मिट्टी का मकाँ मेरा ज़िंदगी शीशे की पत्थर का जहाँ मेरा
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ज़बाँ की नस टटोली तो ये जाना मैं ने मिरी आवाज़ तो अब भी ज़रा ज़िंदा है
Yasmin Khan
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तज़्किरा छेड़ो न उस की बे-वफ़ाई का अब तुम्हें हम क्या बताए बात क्या क्या हैं
Yasmin Khan
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वरक़ पर ज़िंदगी का मैं मिरे मंज़र बनाऊँगी परिंदा इक बनाऊँगी पर वो बे-पर बनाऊँगी
Yasmin Khan
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साए में जिस शजर के वो उम्र भर रहा है इक शाख़ से उसी के तेशा बना रखा है
Yasmin Khan
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जो वॉच तू ने दी थी, कब की तोड़ दी तू वक़्त से लेकिन मिरे, निकला नहीं
Yasmin Khan
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