वरक़ पर ज़िंदगी का मैं मिरे मंज़र बनाऊँगी परिंदा इक बनाऊँगी पर वो बे-पर बनाऊँगी
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आज तो दिल के दर्द पर हँस कर दर्द का दिल दुखा दिया मैं ने
Zubair Ali Tabish
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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तज़्किरा छेड़ो न उस की बे-वफ़ाई का अब तुम्हें हम क्या बताए बात क्या क्या हैं
Yasmin Khan
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ज़बाँ की नस टटोली तो ये जाना मैं ने मिरी आवाज़ तो अब भी ज़रा ज़िंदा है
Yasmin Khan
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शहर-ए-बाराँ में मिट्टी का मकाँ मेरा ज़िंदगी शीशे की पत्थर का जहाँ मेरा
Yasmin Khan
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साए में जिस शजर के वो उम्र भर रहा है इक शाख़ से उसी के तेशा बना रखा है
Yasmin Khan
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हर इक निशाँ मेरा मिटाने में लगा है आईना, मेरा अक्स खाने में लगा है
Yasmin Khan
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