हर इक निशाँ मेरा मिटाने में लगा है आईना, मेरा अक्स खाने में लगा है
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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ज़बाँ की नस टटोली तो ये जाना मैं ने मिरी आवाज़ तो अब भी ज़रा ज़िंदा है
Yasmin Khan
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तज़्किरा छेड़ो न उस की बे-वफ़ाई का अब तुम्हें हम क्या बताए बात क्या क्या हैं
Yasmin Khan
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साए में जिस शजर के वो उम्र भर रहा है इक शाख़ से उसी के तेशा बना रखा है
Yasmin Khan
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शहर-ए-बाराँ में मिट्टी का मकाँ मेरा ज़िंदगी शीशे की पत्थर का जहाँ मेरा
Yasmin Khan
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वरक़ पर ज़िंदगी का मैं मिरे मंज़र बनाऊँगी परिंदा इक बनाऊँगी पर वो बे-पर बनाऊँगी
Yasmin Khan
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