shahr-dar-shahr ye khak-o-khun ki faza sochi-samjhi hui ek tahrik hai unche mahlon mein baithe rahe ahl-e-zar muflison ke makanat jalte rahe
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दबी कुचली हुई सब ख़्वाहिशों के सर निकल आए ज़रा पैसा हुआ तो च्यूँँटियों के पर निकल आए अभी उड़ते नहीं तो फ़ाख़्ता के साथ हैं बच्चे अकेला छोड़ देंगे माँ को जिस दिन पर निकल आए
Mehshar Afridi
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चलती फिरती हुई आँखों से अज़ाँ देखी है मैं ने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है
Munawwar Rana
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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तुम्हारे अंदर छुपी हुई इक हसीन लड़की ज़रा से काजल ज़रा सी लाली से मिल गई है
Vishal Bagh
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जो मेरे साथ मोहब्बत में हुई आदमी एक दफा सोचेगा रात इस डर में गुजारी हम ने कोई देखेगा तो क्या सोचेगा
Tehzeeb Hafi
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ज़िंदगी का हर वरक़ बा-शौक़ पढ़िए ये किताब इक रोज़ लौटानी भी तो है
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ज़िंदगी भर यूँँ मेरे दिल को दुखाया था बहुत क़ब्र पर आया है वो मुझ से मुआ'फ़ी के लिए
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याद करूँँगा इतनी शिद्दत से रब को मैं मेरी इबादत से तेरा चेहरा निखरेगा
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उम्मीद तो थी कि दिन बदलेंगे अपने कभी दिन ऐसे बदले कि अब उम्मीद तक भी नहीं
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उदासी भी तो इक व्रत ही है वो भी ऐसा व्रत कि हँस लेने से भी जो टूटने वाला नहीं
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