shahr kya dekhen ki har manzar mein jale pad gae aisi garmi hai ki pile phul kale pad gae
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ऐ वतन इक रोज़ तेरी ख़ाक में खो जाएँगे सो जाएँगे मर के भी रिश्ता नहीं छूटेगा हिंदुस्तान से ईमान से
Rahat Indori
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गुज़िश्ता साल के ज़ख़्मो हरे-भरे रहना जुलूस अब के बरस भी यहीं से निकलेगा
Rahat Indori
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बोतलें खोल कर तो पी बरसों आज दिल खोल कर भी पी जाए
Rahat Indori
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वो चाहता था कि कासा ख़रीद ले मेरा मैं उस के ताज की क़ीमत लगा के लौट आया
Rahat Indori
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सूरज से जंग जीतने निकले थे बेवक़ूफ़ सारे सिपाही मोम के थे घुल के आ गए
Rahat Indori
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