शरारत नज़ाकत मलाहत अदाएँ तिरे हुस्न में हम ने क्या क्या न देखा
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अब मैं समझा तिरे रुख़्सार पे तिल का मतलब दौलत-ए-हुस्न पे दरबान बिठा रक्खा है
Qamar Moradabadi
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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मत से तिरे सहमत न हो सरकार हिन्दुस्तान में मत दान कर फिर अपना मत ऐसे किसी मतदान में
nakul kumar
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आज पलटे जो ख़्बाब के पन्ने मैं ने दिल की किताब के पन्ने वक़्त ने देख मोड़ रक्खे हैं तेरे हुस्नो शबाब के पन्ने
Sandeep Thakur
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है अब भी बिस्तर-ए-जाँ पर तिरे बदन की शिकन मैं ख़ुद ही मिटने लगा हूँ उसे मिटाते हुए
Azhar Iqbal
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जलता नहीं हूँ आतिश-ए-रुख़सार देख कर करता हूँ नाज़ ताक़त-ए-दीदार देख कर
Shaikh Sohail
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मेरे पिंदार-ए-मोहब्बत का तकाज़ा ये है तुझ को चाहा भी तो औक़ात से बढ़ कर चाहा
Shaikh Sohail
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एजाज़-ए-शायरी कहो अपनी ज़बान से ख़स्ता सोहेल शे'र सुनाओ न तुम कभी
Shaikh Sohail
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हर इक अल्फ़ाज़ में बस तू समाएँ वगरना ये सुख़न हम कह न पाएँ कभी इस क़ितआ का मिसरा रहे तू कभी ग़ज़लों में तुझ को हम छुपाएँ
Shaikh Sohail
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हसीन चाँद को देखूँ तो ऐसा लगता है तुम्हारे हुस्न-ए-समुंदर का एक क़तरा है तुम्हारे हुस्न को देखूँ तो ऐसा लगता है हसीन चाँद तुम्हें देख कर चमकता है
Shaikh Sohail
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