शा'इरी तो सुधार दूँ मैं मगर उस सेे रिश्ते बिगड़ गए तो फिर
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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दिल-परिन्दा क़फ़स में ख़ुश है अब आसमाँ बोझ लग रहा था इसे
Yuvraj Singh Faujdar
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ये इश्क़ का जो खेल है रस्सा-कशी का खेल है जितने भी गिरने वाले हैं सब जीते माने जाते हैं
Yuvraj Singh Faujdar
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कर के वा'दा मुकर गया है कोई इश्क़ करने से डर गया है कोई लाश की बू सी आती है हर रोज़ लगता है मुझ में मर गया है कोई
Yuvraj Singh Faujdar
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उसे अपना बनाने में ये दिक़्क़त है मेरी ग़ज़लें ये जादू कर न पाएँगी
Yuvraj Singh Faujdar
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इतनी बातें करना अच्छा है नहीं सारी बातें बीत जाती हैं मियाँ
Yuvraj Singh Faujdar
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