ये इश्क़ का जो खेल है रस्सा-कशी का खेल है जितने भी गिरने वाले हैं सब जीते माने जाते हैं
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तुम मोहब्बत को खेल कहते हो हम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली
Bashir Badr
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मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे
Ali Zaryoun
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हुस्न बला का क़ातिल हो पर आख़िर को बेचारा है इश्क़ तो वो क़ातिल जिस ने अपनों को भी मारा है ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी
Jaun Elia
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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
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मसअला ये नहीं कि इश्क़ हुआ है हम को मसअला ये है कि इज़हार किया जाना है
Rajesh Reddy
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दिल-परिन्दा क़फ़स में ख़ुश है अब आसमाँ बोझ लग रहा था इसे
Yuvraj Singh Faujdar
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कर के वा'दा मुकर गया है कोई इश्क़ करने से डर गया है कोई लाश की बू सी आती है हर रोज़ लगता है मुझ में मर गया है कोई
Yuvraj Singh Faujdar
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मैं ख़ुद को देखने लगा हूँ दुनिया की नज़रों से सो मुझ को अब आईने में अच्छा नइँ लगता मैं
Yuvraj Singh Faujdar
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वो अच्छी लड़की है बस इक बात का दुख है मुझ को अच्छी चीज़ों की आदत नइँ लगती
Yuvraj Singh Faujdar
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उठा देते हो उँगली आसानी से तुम है हिम्मत तो मिसरा उठा कर बताओ
Yuvraj Singh Faujdar
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